Holy sprictures

Wednesday, August 5, 2020

गोवर्धन पूजा

 गोवर्धन पूजा क्या है??????????


गोवर्धन पूजा के सम्बन्ध में एक लोकगाथा प्रचलित है। कथा यह है कि देवराज इन्द्र को अभिमान हो गया था। इन्द्र का अभिमान चूर करने हेतु भगवान श्री कृष्ण जो स्वयं लीलाधारी श्री हरि विष्णु के अवतार हैं ने एक लीला रची। प्रभु की इस लीला में यूं हुआ कि एक दिन उन्होंने देखा के सभी बृजवासी उत्तम पकवान बना रहे हैं और किसी पूजा की तैयारी में जुटे। श्री कृष्ण ने बड़े भोलेपन से मईया यशोदा से प्रश्न किया " मईया ये आप लोग किनकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं" कृष्ण की बातें सुनकर मैया बोली लल्ला हम देवराज इन्द्र की पूजा के लिए अन्नकूट की तैयारी कर रहे हैं। मैया के ऐसा कहने पर श्री कृष्ण बोले मैया हम इन्द्र की पूजा क्यों करते हैं? मैईया ने कहा वह वर्षा करते हैं जिससे अन्न की पैदावार होती है उनसे हमारी गायों को चारा मिलता है। भगवान श्री कृष्ण बोले हमें तो गोर्वधन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि हमारी गाये वहीं चरती हैं, इस दृष्टि से गोर्वधन पर्वत ही पूजनीय है और इन्द्र तो कभी दर्शन भी नहीं देते व पूजा न करने पर क्रोधित भी होते हैं अत: ऐसे अहंकारी की पूजा नहीं करनी चाहिए।
लीलाधारी की लीला और माया से सभी ने इन्द्र के बदले गोवर्घन पर्वत की पूजा की। देवराज इन्द्र ने इसे अपना अपमान समझा और मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। प्रलय के समान वर्षा देखकर सभी बृजवासी भगवान कृष्ण को कोसने लगे कि, सब इन*#का कहा मानने से हुआ है। तब मुरलीधर ने मुरली कमर में डाली और अपनी कनिष्ठा उंगली पर पूरा गोवर्घन पर्वत उठा लिया और सभी बृजवासियों को उसमें अपने गाय और बछडे़ समेत शरण लेने के लिए बुलाया। इन्द्र कृष्ण की यह लीला देखकर और क्रोधित हुए फलत: वर्षा और तेज हो गयी। इन्द्र का मान मर्दन के लिए तब श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियत्रित करें और शेषनाग से कहा आप मेड़ बनाकर पानी को पर्वत की ओर आने से रोकें।

श्री कृष्ण जी की इस लीला से प्रभावित होकर गोवर्धन की पूजा करने लगे
लेकिन श्री कृष्ण की भी मृत्यु होती ह ओर जन्म।होता ह अविनशी परमात्मा कबीर साहब ह
 हमारे शास्त्रों में बताया हुआ है कि पूर्ण परमात्मा एक होता है जिसका जन्म और मृत्यु नहीं होता है वह अविनाशी होता है और वह पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब हैजिनकी बहुत सी लीलाएं हैं
 कमाल  और कमाली को जिंदा करना

सिकंदर लोदी के जलन का रोग ठीक करना

काशी 18 लाख लोगों को भंडारा करना

 भैंसे से मंत्र बुलवाना

 मरी हुई गाय को जीवित करना और भी बहुत सारे लीला हैं जो कबीर साहिब ने की


वर्तमान स्थिति को देखते हैं तो हम इन सभी देवी देवताओं की भक्ति करते हैं फिर भी हम दुखी हैं और कई बीमारियों से ग्रस्त लेकिन पूर्ण परमात्मा की भक्ति करने से हमारे सारे कष्ट दूर हो जाते हैं आज पूरे विश्व में संत रामपाल जी महाराज हमारे शास्त्रों के अनुसार भक्ति बताते हैं जिससे हमारे सारे कष्ट दूर हो जाते हैं क्योंकि शास्त्रों में प्रमाणित हम भक्ति करते हैं तो हमें सर्व सुख प्राप्त होते हैं और शास्त्रों के अनुसार पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब है

संत रामपाल जी के अनुसार बताए हुए भक्ति अनुसार बहुत से लोग लोगों ने नशा छोड़ दिया लाइलाज बीमारी ठीक हो गई जो डॉक्टर भी मना कर चुके थे कि अब यह जिंदा नहीं रह सकता तो संत रामपाल जी के नाम अनुसार बताया भक्ति करने से साधक ठीक हो जाता है


Wednesday, July 1, 2020

समाज

                  अच्छे समाज का निर्माण
 समाज की वर्तमान स्थिति
                                 हमारे समाज की वर्तमान स्थिति कैसी है आइए हम जानते हैं हमारे समाज में आज फैली   बुराइयां घर कर चुकी है जैसे नशा, रिश्वतखोरी,  चोरी बलात्कार, ठगी इत्यादि
 जैसे नशा नसे से बहुत घर बर्बाद हो चुके हैं और इसमें इंसान शैतान बन जाता है अपने बच्चों से और परिवार से सही ढंग से बात नहीं करता और ना ही समाज में सही तरीके से इंसान रह पाता है क्योंकि नशे में इंसान अपने होश हवास खो देता है



रिश्वतखोरी आज हमारे समाज में फैली रिश्वतखोरी सबसे बड़ी बुराई है क्योंकि हर जगह रिश्वत से ही काम बनता है इससे गरीब इंसान रिश्वत न देने पर वह हर काम में दूर रह जाता और पैसे वाले आगे बढ़ जाते हैं

 बलात्कार आदमी नशा करता है तो वह नशे में अपने होश हवास खो देता है  और बलात्कार जैसी घटनाएं हो जाती हैं

  दहेज प्रथा दहेज की समाज में इतनी मांग बढ़ गई है कि बेटियों गर्भ में ही मार दिया जाता है क्योंकि एक अमीर  पिता तो अपनी बेटी को दहेज दे सकता है लेकिन एक गरीब पिता अपनी बेटी को इतना दहेज नहीं दे पाता है तो वह पिता अपनी बेटी को गर्भ में ही मार देता है

 देखिए इस वीडियो में
https://youtu.be/DS339gvDbz0

इन सभी बुराइयों से निजात पाने के लिए सरकार ने बहुत कोशिश की यह बुलाया समाज से खत्म करने की लेकिन सरकार इस बुराइयों को खत्म नहीं कर पाया दूसरी और
             संत रामपाल जी महाराज इन सभी बुराइयों को खत्म कर रहे हैं और समाज एक नया इन बुराइयों रहित समाज 
तैयार कर रहे हैं

देखिए इस वीडियो में संत रामपाल जी महाराज द्वारा विवाह
सिर्फ 17 मिनट में

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https://youtu.be/59A-SBeJ20k

अधिक जानकारी के लिए किस वेबसाइट पर खोज करें
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www.jagatgururamapalji.org

Wednesday, June 24, 2020

भागवत गीता

 गुरु

       🤔गुरु को भगवान क्यों  माने
 आइए हम जानते हैं इसके बारे में
हमारे पवित्र शास्त्रों में प्रमाण है कि गुरु बिना मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती जैसे 
श्रीमद्भागवत गीता 
वेद 
पुराण 
बाइबल
 गुरु ग्रंथ साहिब
 इसमें प्रमाणित है जिसने भी मोक्ष की प्राप्ति हुई है उन्होंने गुरु बनाया है

 भागवत गीता में प्रमाण है श्री कृष्णा अर्जुन को कह रहे हैं कि हे अर्जुन तुम उस परमेश्वर की शरण में जाओ जो इस संसार रूपी  वृक्ष को मूल जड़ तना सहित ज्ञान रखता हो 
क्योंकि गीताजी के अध्याय नंबर 15 के श्लोक नंबर 1 से 4 में प्रमाण है कि जो इस  संसार रूपी वृक्ष को मूल जड़ तना पत्ता सहित ज्ञान बताएगा वह तत्वदर्शी संत होगा इससे सिद्ध होता है कि गुरु होना अति अनिवार्य है मोक्ष की प्राप्ति के लिए
 ग्रंथ साहिब में प्रमाण है मोक्ष की प्राप्ति हुई और उन्होंने गुरु बनाया
गुरु को भगवान इसलिए मानते हैं क्योंकि गुरु बिना हम  मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती है


गुरु गोविंद दोनों खड़े किसके लागूं पाय बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए
इस वाणी से सिद्ध होता है कि हमें शुरू से बढ़कर भगवान से बढ़कर गुरु होता है क्योंकि अगर गुरु हमें नहीं मिलता तो हमें पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती इसलिए हमें गुरु को भगवान मानते हैं

Wednesday, June 17, 2020

कृष्णजन्माष्टमी


कृष्णजन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जनमोत्सव है। योगेश्वर कृष्ण के भगवद्गीता के उपदेश अनादि काल से जनमानस के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहे हैं। जन्माष्टमी को भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्रीकृष्ण ने अपना अवतार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में जन्म लिया। इसलिये भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते 



                   श्री कृष्ण जी की लीलाएं


भगवान श्री कृष्ण ने बहुत सी  लीला की है जब द्रोपती का चीर हरण हो रहा था तब द्रौपदी ने श्रीकृष्ण को पुकारा और अन्य भगवान को भी पुकारा लेकिन उस समय श्री कृष्णा रुक्मणी के साथ चौसर खेल रहे थे तब  द्रोपती ने हृदय से पूर्ण परमात्मा को पुकारा तब कबीर परमेश्वर ने उनका चीर बढ़ाया क्योंकि द्रौपदी ने एक बुड्ढे अंधे साधु को अपना एक साड़ी का टुकड़ादेकर उनकी लाज बचाई थी तब उस साधु ने उस को आशीर्वाद दिया था कि बेटा आज तुमने मेरी लाज बचाई भगवान तुम्हारी भी लाज बचाएगा


श्री कृष्ण जी ने एक लीला करके यह बताया है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब है एक बार श्री कृष्ण जी ने भगवान इंद्र का घमंड तोड़ने के लिए वृंदावन के लोगों को कहा कि तुम गोवर्धन पर्वत की पूजा करो तब भगवान इंद्र ने श्रीकृष्ण पर गुस्सा होकर वृंदावन पर बहुत बारिश की तब श्री कृष्ण ने एक पूरा पहाड़ अपनी सबसे छोटी अंगुली पर उठा लिया था और वंदावन के लोगों को बचाया और उन्होंने यह भी बताया कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब है 

 मीराबाई ने आजीवन श्रीकृष्ण की भक्ति नहीं की थी मीराबाई को जब कबीर साहेब संत रविदास के रूप में मिले थेतब उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण पूर्ण परमात्मा नहीं है तब मीराबाई ने पूछा कि मैं तो उनको ही पूर्ण परमात्मा मानती हूं तब संत रविदास जी ने कहा कि आप खुद श्रीकृष्ण से पूछ लेना वह आपको बता देंगे तब मीराबाई ने रात को श्रीकृष्ण से बात की तब उन्होंने पूछा कि  आप से भी कोई ऊपर भगवान है तब श्री कृष्ण भगवान ने कहा कि हां  मेरे से ऊपर भी पूर्ण परमात्मा है तब मीराबाई ने संत रविदास जी से नाम दीक्षा लेकर परमात्मा की भक्ति की थी

 श्री कृष्ण जी ने अपने दोस्त सुदामा को एक मुट्ठी भर चावल देने के बदले एक उन को महल बना कर दे दिया था और कबीर परमेश्वर ने तैमूर लंग को एक रोटी के बदले 7 पीढ़ी का राज दिया था

 👉भगवान श्री कृष्ण का भी जन्म मरण होता है वह पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब हैं जिसका जन्म मरण नहीं होता है वह स शरीर आते हैं और सशरीर सतलोक जाते हैं




 👉हमारे वेदों और सद ग्रंथों  अनुसार पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब है अधिक जानकारी के लिए अवश्य  देखें  वेबसाइट 
Www.jagatgururamapalji.org

Friday, June 5, 2020

GodKabir PrakatDiwas

5 June कबीर परमेश्वर प्रकट 


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🌺 *सतगुरु रामपाल जी महाराज जी* सतग्रंथों से प्रमाणित करके कबीर परमात्मा के प्राकाट्य के बारे में बताते हैं :-


🎊 काशी में एक लहरतारा तालाब था। गंगा नदी का जल लहरों के द्वारा नीची पटरी के ऊपर से उछल कर एक सरोवर में आता था। इसलिए उस सरोवर का नाम लहरतारा पड़ा। उस तालाब में बड़े-2 कमल के फूल उगे हुए थे। नीरू-नीमा(नि:सन्तान दम्पत्ति थे) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के लिए गए हुए थे। वहां नीरू - नीमा को कमल कद फूल पर शिशु रूप में कबीर परमात्मा मिले थे।








🎊कबीर साहेब प्रकट दिवस
विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा सुबह-सुबह ब्रह्ममुहूर्त में वह पूर्ण परमेश्वर कबीर (कविर्देव) जी स्वयं अपने मूल स्थान सतलोक से आए। काशी में लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर एक बालक का रूप धारण किया।

🎊कबीर साहेब प्रकट दिवस
जब कबीर परमेश्वर काशी में शिशु रूप में प्रकट हुए तब उनको देखकर कोई कह रहा था कि यह बालक तो कोई देवता का अवतार है। कोई कह रहा था यह तो साक्षात विष्णु जी ही आए लगते हैं। कोई कह रहा था यह भगवान शिव ही अपनी काशी को कृतार्थ करने को उत्पन्न हुए हैं।

🎊कबीर साहेब जी को नवजात शिशु रूप में देखकर जुलाहा कॉलोनी के लोग कह रहे थे कि बालक की आंखें जैसे कमल का फूल हों, लंबे हाथ, गोरा वर्ण। शरीर से मानो नूर झलक रहा हो। पूरी काशी नगरी में ऐसा अद्भुत बालक नहीं था।

🎊कबीर साहेब प्रकट दिवस
गरीब, गोद लिया मुख चूम करि, हेम रूप झलकंत।
जगर मगर काया करै, दमकै पदम् अनंत।।
जब परमेश्वर कबीर साहेब धरती पर सशरीर अवतरित हुए और पुण्यकर्मी दंपत्ति ने उनको गोद में लिया तो उनके शरीर की शोभा अद्भुत ही थी।

🎊कबीर साहेब प्रकट दिवस
गरीब दूनी कहै योह देव है, देव कहत हैं ईश।
ईश कहै पारब्रह्म है, पूरण बीसवे बीस।।
कबीर परमेश्वर के शिशु रूप को देखकर काशी के लोग कह रहे थे की ये तो कोई देवता का अवतार है, देवता कह रहे थे कि यह स्वयं ईश्वर है और ईश्वर कहते हैं कि ये स्वयं पूर्ण ब्रह्म आये हैं पृथ्वी पर।

🎊गरीब ,काशी उमटी गुल भया, मोमन का घर घेर।
कोई कहै ब्रह्मा विष्णु हैं, कोई कहै इन्द्र कुबेर।।
पूरी काशी परमेश्वर कबीर जी के बालक रूप को देखने को उमड़ पड़ी। बच्चे को देखकर कोई कह रहा है था कि ये बालक ब्रह्मा का अवतार है कोई कह रहा था साक्षात् विष्णु भगवान आये हैं, कोई इन्द्र कुबेर कह रहा था।

🎊जब काजी कुरान लेकर शिशु रूप कबीर परमेश्वर का नामंकन करने गए तब कुरान शरीफ खोली तो उसमें सर्व अक्षर कबीर-कबीर-कबीर-कबीर हो गए। कबीर परमेश्वर शिशु रूप में बोले मैं कबीर अल्लाह अर्थात् अल्लाहु अकबर, हूँ। मेरा नाम ‘‘कबीर’’ ही रखो।
काजी गये कुरान ले, धरि लड़के का नाम।
अक्षर अक्षर में फुरया, धन कबीर बलि जांव।।
सकल कुरान कबीर है, हरफ लिखे जो लेख।
काशी के काजी कहै, गई दीन की टेक।।

🎊कबीर परमेश्वर सन् 1398, ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी को ब्रह्म मुहूर्त में अपने निज धाम सतलोक से चलकर आए और काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर शिशु रूप धारण करके विराजमान हुए। जहाँ से नीरू-नीमा उठा कर ले गये और पुत्रवत पालन किया।
कबीर, ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।।

🎊ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में कबीर परमेश्वर जी काशी के लहरतारा तालाब पर कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट हुए। इस लीला को ऋषि अष्टानन्द जी ने आंखों देखा। वहाँ से नीरू-नीमा परमेश्वर कबीर जी को अपने घर ले आये।
गरीब, काशीपुरी कस्त किया, उतरे अधर उधार।
मोमन कूं मुजरा हुआ, जंगल में दीदार।।
स्वामी रामानंद जी ने अष्टानन्द जी से कहा, जब कोई अवतारी शक्ति पृथ्वी पर लीला करने आती है तो ऐसी घटना होती है।

🎊 कबीर परमेश्वर शिशु रूप में काशी में अवतरित हुए तो उनको देखने के लिए पूरी काशी के लोग उमड़ उमड़ कर आ रहे थे। ऐसा अद्भुत बच्चा उन्होंने आज तक नहीं देखा था। बच्चे का शरीर सफेद बर्फ की तरह चमक रहा था। बालक को देखने के लिए ऊपर से सूक्ष्म रूप में देवता भी आए।
गरीब, गोद लिया मुख चूंबि कर, हेम रूप झलकंत।
जगर मगर काया करै, जैसे दमकैं पदम अनंत।।

🎊काशी में जो भी बालक (कबीर परमात्मा) को देखता वही अन्य को बताता कि नूर अली को एक बालक तालाब पर मिला है आज ही उत्पन्न हुआ शिशु है। डर के मारे लोक लाज के कारण किसी विधवा ने डाला होगा। बालक को देखने के पश्चात् उसके चेहरे से दृष्टि हटाने को दिल नहीं करता, आत्मा अपने आप खिंची जाती है। पता नहीं बालक के मुख पर कैसा जादू है, पूरी काशी परमेश्वर के बालक रूप को देखने को उमड़ पड़ी। स्त्री-पुरूष झुण्ड के झुण्ड बना कर मंगल गान गाते हुए, नीरू के घर बच्चे को देखने को आए थे।

🎊 शिशु रूप में प्रकट कबीर परमेश्वर जी ने 25 दिन तक कुछ नहीं खाया। लेकिन ऐसा स्वस्थ शरीर था जैसे प्रतिदिन 1 किलो दूध पीते हों। 25 दिन की आयु में कबीर साहेब जी ने लीला करके कहा मैं कुंवारी गाय का दूध पीता हूं। कबीर परमात्मा ने शिव जी से कहा कि कुंवारी गाय मंगवाओ, आप गाय पर थपकी मार देना फिर मेरे आशीर्वाद से कुंवारी गाय दूध देगी। नीरू एक बछिया लाया, गाय ने दूध दिया।
गरीब, अन ब्यावर कूं दूहत है, दूध दिया तत्काल
पीवै बालक ब्रह्मगति, तहां शिव भये दयाल।।

🎊कबीर साहेब प्राकाट्य
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में प्रमाण है, कि पूर्ण परमात्मा अमर पुरुष जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है उस समय कुंवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है।
यह लीला केवल कबीर परमात्मा ही करते हैं।

🎊कबीर परमात्मा का जन्म माँ के गर्भ से नहीं होता। वह स्वयं सतलोक से सशरीर आते हैं अपना तत्वज्ञान देने और मोक्ष प्रदान करने।
संत गरीबदास जी की वाणी है -
न सतगरु जननी जने, उनके मां न बाप।
पिंड ब्रह्मंड से अगम है, जहां न तीनों ताप।।

🎊कबीर परमेश्वर का शरीर हाड़ मांस से बना नहीं है। वह अविनाशी परमात्मा हैं। कबीर परमात्मा जन्म-मृत्यु से परे हैं। वह सशरीर प्रकट हुए थे और सशरीर मगहर से अपने सतलोक गए थे।
हाड चाम लोहू नहीं मोरे, जाने सत्यनाम उपासी।
तारन तरन अभै पद दाता, मैं हूं कबीर अविनासी।।


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https://youtu.be/9_9v67Tbhmg

Wednesday, June 3, 2020

कबीरपरमेश्वर_का_अद्भुतज्ञान

🏅कबीर परमेश्वर जी ने गुरू और सतगुरू में भेद बताया तथा सच्चे गुरु के लक्षण बताए।
सतगुरु के लक्षण कहु, मधुरे बेन विनोद, 
चार वेद छः सास्त्र, वो कह अट्ठारह बोध।।
कबीर साहेब जी ने तत्वज्ञान दिया कि मानव जीवन में सतगुरु बनाकर भक्ति करना परमावश्यक है। सच्चे गुरु की शरण में जाकर दीक्षा लेने से ही पूर्ण लाभ मिलेगा, अन्यथा मानव जीवन बर्बाद है।
वर्तमान में पूर्ण सतगुरु केवल संत रामपाल जी महाराज ही हैं। उनसे सतभक्ति प्राप्त करके मोक्ष प्राप्त करें।


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Must watch sadhna chanal 7:30 pm

Sunday, May 31, 2020

कबीरपरमेश्वर_के_साथ_52बदमाशी



कबीरपरमेश्वर_के_साथ_52बदमाशी


शशेखतकी ने कबीर साहेब जी को 52 बार मारने की कोशिश की थी।


♣️कबीर जी को मारने के लिए उन्हें खूनी हाथी के आगे बांध कर डाला गया।
लेकिन अविनाशी कबीर जी ने हाथी को शेर रूप दिखा दिया। जिससे हाथी भयभीत होकर भाग गया।
सबने कबीर जी की जय जयकार की।

♣️कबीर परमेश्वर को तोप के गोलों से मारने की व्यर्थ चेष्टा"
कबीर जी को मारने के लिए शेखतकी के आदेश पर पहले पत्थर मारे, फिर तीर मारे। परन्तु परमेश्वर की ओर पत्थर या तीर नहीं आया। फिर चार पहर तक तोप यंत्र से गोले चलाए गए।
लेकिन दुष्ट लोग अविनाशी कबीर जी का कुछ नहीं बिगाड़ सके।

♣️दिल्ली के सम्राट सिकंदर लोधी ने जनता को शांत करने के लिए अपने हाथों से हथकड़ियाँ लगाई, पैरों में बेड़ी तथा गले में लोहे की भारी बेल डाली आदेश दिया गंगा दरिया में डुबोकर मारने का। उनको दरिया में फैंक दिया। कबीर परमेश्वर जी की हथकड़ी, बेड़ी और लोहे की बेल अपने आप टूट गयी। परमात्मा जल पर सुखासन में बैठे रहे कुछ नहीं बिगड़ा।

♣️कबीर परमात्मा जब एक बार गंगा दरिया में डुबोने से भी नहीं डूबे तो शेखतकी ने फिर आदेश दिया कि पत्थर बाँधकर पुन: गंगा के मध्य ले जाकर जल में फैंक दो। सब पत्थर बँधन मुक्त होकर जल में डूब गए, परंतु परमेश्वर कबीर जी जल के ऊपर सुखासन लगाए बैठे रहे। नीचे से गंगा जल की लहरें बह रही थी। परमेश्वर आराम से जल के ऊपर बैठे थे।

♣️कबीर साहेब को मारने के लिए शेखतकी ने तलवार से वार करवाये। लेकिन तलवार कबीर साहेब के आर पार हो जाती क्योंकि कबीर साहेब का शरीर पाँच तत्व का नहीं बना था उनका नूरी शरीर था। फिर सभी लोगों ने कबीर साहेब की जय जयकार की।
साहेब कबीर को मारण चाल्या, शेखतकी जलील।
आर पार तलवार निकल ज्या, समझा नहीं खलील।।

♣️उबलते तेल में जलाने की चेष्टा
कबीर जी को जीवित जलाने के लिए उन्हें उबलते तेल के कड़ाहे में डाला गया। लेकिन समर्थ अविनाशी परमात्मा का  बाल भी बांका नहीं हुआ।

♣️"शेखतकी द्वारा कबीर साहेब को गहरे कुँए में डालना"
शेखतकी ने कबीर साहेब को बांध कर गहरे कुँए में डाल दिया, ऊपर से मिट्टी, ईंट और पत्थर से कुँए को पूरा भर दिया। फिर शेखतकी सिकन्दर राजा के पास गया वहां जाकर देखा तो कबीर परमेश्वर पहले से ही विराजमान थे।

♣️कबीर परमेश्वर को शेखतकी ने उबलते हुए तेल में बिठाया। लेकिन कबीर साहेब ऐसे बैठे थे जैसे कि तेल गर्म ही ना हो। सिकन्दर बादशाह ने तेल के परीक्षण के लिए अपनी उंगली डाली, तो उसकी उंगली जल गई। लेकिन अविनाशी कबीर परमेश्वर जी को कुछ भी नहीं हुआ।

♣️कबीर साहेब जब सत्संग कर रहे थे तब शेखतकी ने सिपाही से कहा कि इनके गले में जहरीला साँप डाल दो लेकिन वो साँप कबीर साहेब के गले में डालते ही सुंदर पुष्पों की माला बन गया। क्योंकि कबीर साहेब पूर्ण परमात्मा थे।

♣️कबीर साहेब सिकंदर लोधी के दरबार में बैठकर सत्संग कर रहे थे तब शेखतकी ने सिपाही से कहा कि लोहे को गर्म करके पिघलाकर पानी की तरह बनाओ और कबीर साहेब पर डालो। ठीक ऐसा ही हुआ जब लोहा गर्म करके पिघलाकर कबीर साहेब पर डाला तब वह फूल बन गए जैसे की मानो फूलों की वर्षा होने लगी। तब सभी ने कबीर साहेब की जय जयकार लगाई।

♣️परमात्मा के शरीर में कीले ठोकने का व्यर्थ प्रयत्न"
कबीर साहेब को मारने के लिए एक दिन शेखतकी ने सिपाहियों को आदेश दिया की कबीर साहेब को पेड़ से बांधकर शरीर पर बड़ी बड़ी कील ठोक दो। लेकिन जब कील ठोकने चले तो सिपाहियों के हाथ पैर काम करना बंद हो गए और वो वहाँ से भाग गए और शेखतकी को फिर परमात्मा कबीर साहेब के सामने लज्जित होना पड़ा।

♣️शेखतकी पीर ने कबीर साहेब को नीचा दिखाने के लिए 3 दिन के भंडारे की कबीर साहेब के नाम से सभी सभी आश्रमों में झूठी चिठ्ठी डलवाई थी कि कबीर जी 3 दिन का भंडारा करेंगे सभी आना भोजन के बाद एक मोहर, एक दोहर भी देंगे। कबीर साहेब ने 3 दिन का मोहन भंडारा भी करा दिया था और कबीर साहेब की महिमा भी हुई।


♣️"भूखा प्यासा मारने की चेष्टा"
एक दिन शेखतकी ने कबीर साहेब को नीम के पेड़ में लोहे के तार से बांधकर भूखा प्यासा छोड़ दिया और सोचा कि कबीर साहेब मर जाएंगे। लेकिन कबीर साहेब को कुछ नहीं हुआ और वो वापिस जीवित दरबार में पहुँच गए।
पानी से पैदा नहीं, स्वांसा नहीं शरीर।
अन्न आहार करता नहीं, ताका नाम कबीर।।

♣️"मुर्दे को जीवित करने की परीक्षा लेना"
दिल्ली के बादशाह सिकन्दर लोधी के पीर शेख तकी ने कहा कबीर जी को तब अल्लाह मानेंगे जब मेरी मरी हुई लड़की को जीवित कर देगा जो कब्र में दबी हुई है। कबीर परमेश्वर जी ने अपनी समर्थ शक्ति से हजारों लोगों के सामने उस लड़की को जीवित किया और उसका नाम कमाली रखा। कबीर परमेश्वर सर्वशक्तिमान हैं।

♣️"कबीर साहेब को जहरीले बिच्छू द्वारा मारने का प्रयास"
शेखतकी के आदेश पर सिपाही बहुत सारे बिच्छू टोकरी में भरकर सिकंदर लोधी राजा के दरबार में गए जहाँ कबीर साहेब सत्संग कर रहे थे फिर सिपाहियों ने कबीर साहेब पर बिच्छू छोड़ना शुरू कर दिया। लेकिन सभी बिच्छू कबीर साहेब तक पहुँचने से पहले ही विलीन हो गए।
यह देखकर सभी लोग हैरान हो गए और कबीर साहेब के जयकारे लगाने लगे

♣️"खूनी हाथी से मरवाने की व्यर्थ चेष्टा"
शेखतकी के कहने पर दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी ने कबीर परमेश्वर को खूनी हाथी से मरवाने की आज्ञा दे दी। शेखतकी ने महावत से कहकर हाथी को एक-दो शीशी शराब की पिलाने को कहा।
हाथी मस्ती में भरकर कबीर परमेश्वर को मारने चला। कबीर जी के हाथ-पैर बाँधकर पृथ्वी पर डाल रखा था। जब हाथी परमेश्वर कबीर जी से दस कदम (50 फुट) दूर रह गया तो परमेश्वर कबीर के पास बब्बर शेर खड़ा केवल हाथी को दिखाई दिया। हाथी डर से चिल्लाकर (चिंघाड़ मारकर) भागने लगा। परमेश्वर के सब रस्से टूट गए। उनका तेजोमय विराट रूप सिकंदर लोधी को दिखा। तब बादशाह ने कांपते हुए अपने गुनाह की माफी मांगी।


♣️दिल्ली के बादशाह सिकन्दर लोधी के पीर शेखतकी ने कहा कि अगर यह कबीर अल्लाह है तो इसकी परीक्षा ली जाए कोई मुर्दा जीवित करे। तब सर्वशक्तिमान कबीर परमात्मा ने दरिया में बहते आ रहे एक लडके के‌ शव को हजारों लोगों के सामने जीवित किया। उसका नाम कमाल रखा। कबीर परमेश्वर समर्थ भगवान हैं। पूर्ण परमात्मा ही मृत व्यक्ति को जीवित कर सकता हैं।


♣️शेखतकी ने जुल्म गुजारे, बावन करी बदमाशी,
खूनी हाथी के आगे‌ डालै, बांध जूड अविनाशी,
हाथी डर से भाग जासी, दुनिया गुण गाती है।
शेखतकी ने अविनाशी को मारने के लिए खूनी हाथी के आगे डाला। हाथी कबीर भगवान के पास जाते ही डर कर भाग गया। तब लोगों ने कबीर साहेब की जय-जय कार की। कबीर भगवान अविनाशी है।

👆 इस तरह से 52 बार मारने का प्रयास किया गया था कबीर परमात्मा को,


गोवर्धन पूजा

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