Holy sprictures

Wednesday, June 24, 2020

भागवत गीता

 गुरु

       🤔गुरु को भगवान क्यों  माने
 आइए हम जानते हैं इसके बारे में
हमारे पवित्र शास्त्रों में प्रमाण है कि गुरु बिना मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती जैसे 
श्रीमद्भागवत गीता 
वेद 
पुराण 
बाइबल
 गुरु ग्रंथ साहिब
 इसमें प्रमाणित है जिसने भी मोक्ष की प्राप्ति हुई है उन्होंने गुरु बनाया है

 भागवत गीता में प्रमाण है श्री कृष्णा अर्जुन को कह रहे हैं कि हे अर्जुन तुम उस परमेश्वर की शरण में जाओ जो इस संसार रूपी  वृक्ष को मूल जड़ तना सहित ज्ञान रखता हो 
क्योंकि गीताजी के अध्याय नंबर 15 के श्लोक नंबर 1 से 4 में प्रमाण है कि जो इस  संसार रूपी वृक्ष को मूल जड़ तना पत्ता सहित ज्ञान बताएगा वह तत्वदर्शी संत होगा इससे सिद्ध होता है कि गुरु होना अति अनिवार्य है मोक्ष की प्राप्ति के लिए
 ग्रंथ साहिब में प्रमाण है मोक्ष की प्राप्ति हुई और उन्होंने गुरु बनाया
गुरु को भगवान इसलिए मानते हैं क्योंकि गुरु बिना हम  मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती है


गुरु गोविंद दोनों खड़े किसके लागूं पाय बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए
इस वाणी से सिद्ध होता है कि हमें शुरू से बढ़कर भगवान से बढ़कर गुरु होता है क्योंकि अगर गुरु हमें नहीं मिलता तो हमें पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति नहीं होती इसलिए हमें गुरु को भगवान मानते हैं

Wednesday, June 17, 2020

कृष्णजन्माष्टमी


कृष्णजन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जनमोत्सव है। योगेश्वर कृष्ण के भगवद्गीता के उपदेश अनादि काल से जनमानस के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहे हैं। जन्माष्टमी को भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्रीकृष्ण ने अपना अवतार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में जन्म लिया। इसलिये भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते 



                   श्री कृष्ण जी की लीलाएं


भगवान श्री कृष्ण ने बहुत सी  लीला की है जब द्रोपती का चीर हरण हो रहा था तब द्रौपदी ने श्रीकृष्ण को पुकारा और अन्य भगवान को भी पुकारा लेकिन उस समय श्री कृष्णा रुक्मणी के साथ चौसर खेल रहे थे तब  द्रोपती ने हृदय से पूर्ण परमात्मा को पुकारा तब कबीर परमेश्वर ने उनका चीर बढ़ाया क्योंकि द्रौपदी ने एक बुड्ढे अंधे साधु को अपना एक साड़ी का टुकड़ादेकर उनकी लाज बचाई थी तब उस साधु ने उस को आशीर्वाद दिया था कि बेटा आज तुमने मेरी लाज बचाई भगवान तुम्हारी भी लाज बचाएगा


श्री कृष्ण जी ने एक लीला करके यह बताया है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब है एक बार श्री कृष्ण जी ने भगवान इंद्र का घमंड तोड़ने के लिए वृंदावन के लोगों को कहा कि तुम गोवर्धन पर्वत की पूजा करो तब भगवान इंद्र ने श्रीकृष्ण पर गुस्सा होकर वृंदावन पर बहुत बारिश की तब श्री कृष्ण ने एक पूरा पहाड़ अपनी सबसे छोटी अंगुली पर उठा लिया था और वंदावन के लोगों को बचाया और उन्होंने यह भी बताया कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब है 

 मीराबाई ने आजीवन श्रीकृष्ण की भक्ति नहीं की थी मीराबाई को जब कबीर साहेब संत रविदास के रूप में मिले थेतब उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण पूर्ण परमात्मा नहीं है तब मीराबाई ने पूछा कि मैं तो उनको ही पूर्ण परमात्मा मानती हूं तब संत रविदास जी ने कहा कि आप खुद श्रीकृष्ण से पूछ लेना वह आपको बता देंगे तब मीराबाई ने रात को श्रीकृष्ण से बात की तब उन्होंने पूछा कि  आप से भी कोई ऊपर भगवान है तब श्री कृष्ण भगवान ने कहा कि हां  मेरे से ऊपर भी पूर्ण परमात्मा है तब मीराबाई ने संत रविदास जी से नाम दीक्षा लेकर परमात्मा की भक्ति की थी

 श्री कृष्ण जी ने अपने दोस्त सुदामा को एक मुट्ठी भर चावल देने के बदले एक उन को महल बना कर दे दिया था और कबीर परमेश्वर ने तैमूर लंग को एक रोटी के बदले 7 पीढ़ी का राज दिया था

 👉भगवान श्री कृष्ण का भी जन्म मरण होता है वह पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब हैं जिसका जन्म मरण नहीं होता है वह स शरीर आते हैं और सशरीर सतलोक जाते हैं




 👉हमारे वेदों और सद ग्रंथों  अनुसार पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब है अधिक जानकारी के लिए अवश्य  देखें  वेबसाइट 
Www.jagatgururamapalji.org

Friday, June 5, 2020

GodKabir PrakatDiwas

5 June कबीर परमेश्वर प्रकट 


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🌺 *सतगुरु रामपाल जी महाराज जी* सतग्रंथों से प्रमाणित करके कबीर परमात्मा के प्राकाट्य के बारे में बताते हैं :-


🎊 काशी में एक लहरतारा तालाब था। गंगा नदी का जल लहरों के द्वारा नीची पटरी के ऊपर से उछल कर एक सरोवर में आता था। इसलिए उस सरोवर का नाम लहरतारा पड़ा। उस तालाब में बड़े-2 कमल के फूल उगे हुए थे। नीरू-नीमा(नि:सन्तान दम्पत्ति थे) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के लिए गए हुए थे। वहां नीरू - नीमा को कमल कद फूल पर शिशु रूप में कबीर परमात्मा मिले थे।








🎊कबीर साहेब प्रकट दिवस
विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा सुबह-सुबह ब्रह्ममुहूर्त में वह पूर्ण परमेश्वर कबीर (कविर्देव) जी स्वयं अपने मूल स्थान सतलोक से आए। काशी में लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर एक बालक का रूप धारण किया।

🎊कबीर साहेब प्रकट दिवस
जब कबीर परमेश्वर काशी में शिशु रूप में प्रकट हुए तब उनको देखकर कोई कह रहा था कि यह बालक तो कोई देवता का अवतार है। कोई कह रहा था यह तो साक्षात विष्णु जी ही आए लगते हैं। कोई कह रहा था यह भगवान शिव ही अपनी काशी को कृतार्थ करने को उत्पन्न हुए हैं।

🎊कबीर साहेब जी को नवजात शिशु रूप में देखकर जुलाहा कॉलोनी के लोग कह रहे थे कि बालक की आंखें जैसे कमल का फूल हों, लंबे हाथ, गोरा वर्ण। शरीर से मानो नूर झलक रहा हो। पूरी काशी नगरी में ऐसा अद्भुत बालक नहीं था।

🎊कबीर साहेब प्रकट दिवस
गरीब, गोद लिया मुख चूम करि, हेम रूप झलकंत।
जगर मगर काया करै, दमकै पदम् अनंत।।
जब परमेश्वर कबीर साहेब धरती पर सशरीर अवतरित हुए और पुण्यकर्मी दंपत्ति ने उनको गोद में लिया तो उनके शरीर की शोभा अद्भुत ही थी।

🎊कबीर साहेब प्रकट दिवस
गरीब दूनी कहै योह देव है, देव कहत हैं ईश।
ईश कहै पारब्रह्म है, पूरण बीसवे बीस।।
कबीर परमेश्वर के शिशु रूप को देखकर काशी के लोग कह रहे थे की ये तो कोई देवता का अवतार है, देवता कह रहे थे कि यह स्वयं ईश्वर है और ईश्वर कहते हैं कि ये स्वयं पूर्ण ब्रह्म आये हैं पृथ्वी पर।

🎊गरीब ,काशी उमटी गुल भया, मोमन का घर घेर।
कोई कहै ब्रह्मा विष्णु हैं, कोई कहै इन्द्र कुबेर।।
पूरी काशी परमेश्वर कबीर जी के बालक रूप को देखने को उमड़ पड़ी। बच्चे को देखकर कोई कह रहा है था कि ये बालक ब्रह्मा का अवतार है कोई कह रहा था साक्षात् विष्णु भगवान आये हैं, कोई इन्द्र कुबेर कह रहा था।

🎊जब काजी कुरान लेकर शिशु रूप कबीर परमेश्वर का नामंकन करने गए तब कुरान शरीफ खोली तो उसमें सर्व अक्षर कबीर-कबीर-कबीर-कबीर हो गए। कबीर परमेश्वर शिशु रूप में बोले मैं कबीर अल्लाह अर्थात् अल्लाहु अकबर, हूँ। मेरा नाम ‘‘कबीर’’ ही रखो।
काजी गये कुरान ले, धरि लड़के का नाम।
अक्षर अक्षर में फुरया, धन कबीर बलि जांव।।
सकल कुरान कबीर है, हरफ लिखे जो लेख।
काशी के काजी कहै, गई दीन की टेक।।

🎊कबीर परमेश्वर सन् 1398, ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी को ब्रह्म मुहूर्त में अपने निज धाम सतलोक से चलकर आए और काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर शिशु रूप धारण करके विराजमान हुए। जहाँ से नीरू-नीमा उठा कर ले गये और पुत्रवत पालन किया।
कबीर, ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।।

🎊ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में कबीर परमेश्वर जी काशी के लहरतारा तालाब पर कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट हुए। इस लीला को ऋषि अष्टानन्द जी ने आंखों देखा। वहाँ से नीरू-नीमा परमेश्वर कबीर जी को अपने घर ले आये।
गरीब, काशीपुरी कस्त किया, उतरे अधर उधार।
मोमन कूं मुजरा हुआ, जंगल में दीदार।।
स्वामी रामानंद जी ने अष्टानन्द जी से कहा, जब कोई अवतारी शक्ति पृथ्वी पर लीला करने आती है तो ऐसी घटना होती है।

🎊 कबीर परमेश्वर शिशु रूप में काशी में अवतरित हुए तो उनको देखने के लिए पूरी काशी के लोग उमड़ उमड़ कर आ रहे थे। ऐसा अद्भुत बच्चा उन्होंने आज तक नहीं देखा था। बच्चे का शरीर सफेद बर्फ की तरह चमक रहा था। बालक को देखने के लिए ऊपर से सूक्ष्म रूप में देवता भी आए।
गरीब, गोद लिया मुख चूंबि कर, हेम रूप झलकंत।
जगर मगर काया करै, जैसे दमकैं पदम अनंत।।

🎊काशी में जो भी बालक (कबीर परमात्मा) को देखता वही अन्य को बताता कि नूर अली को एक बालक तालाब पर मिला है आज ही उत्पन्न हुआ शिशु है। डर के मारे लोक लाज के कारण किसी विधवा ने डाला होगा। बालक को देखने के पश्चात् उसके चेहरे से दृष्टि हटाने को दिल नहीं करता, आत्मा अपने आप खिंची जाती है। पता नहीं बालक के मुख पर कैसा जादू है, पूरी काशी परमेश्वर के बालक रूप को देखने को उमड़ पड़ी। स्त्री-पुरूष झुण्ड के झुण्ड बना कर मंगल गान गाते हुए, नीरू के घर बच्चे को देखने को आए थे।

🎊 शिशु रूप में प्रकट कबीर परमेश्वर जी ने 25 दिन तक कुछ नहीं खाया। लेकिन ऐसा स्वस्थ शरीर था जैसे प्रतिदिन 1 किलो दूध पीते हों। 25 दिन की आयु में कबीर साहेब जी ने लीला करके कहा मैं कुंवारी गाय का दूध पीता हूं। कबीर परमात्मा ने शिव जी से कहा कि कुंवारी गाय मंगवाओ, आप गाय पर थपकी मार देना फिर मेरे आशीर्वाद से कुंवारी गाय दूध देगी। नीरू एक बछिया लाया, गाय ने दूध दिया।
गरीब, अन ब्यावर कूं दूहत है, दूध दिया तत्काल
पीवै बालक ब्रह्मगति, तहां शिव भये दयाल।।

🎊कबीर साहेब प्राकाट्य
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में प्रमाण है, कि पूर्ण परमात्मा अमर पुरुष जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है उस समय कुंवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है।
यह लीला केवल कबीर परमात्मा ही करते हैं।

🎊कबीर परमात्मा का जन्म माँ के गर्भ से नहीं होता। वह स्वयं सतलोक से सशरीर आते हैं अपना तत्वज्ञान देने और मोक्ष प्रदान करने।
संत गरीबदास जी की वाणी है -
न सतगरु जननी जने, उनके मां न बाप।
पिंड ब्रह्मंड से अगम है, जहां न तीनों ताप।।

🎊कबीर परमेश्वर का शरीर हाड़ मांस से बना नहीं है। वह अविनाशी परमात्मा हैं। कबीर परमात्मा जन्म-मृत्यु से परे हैं। वह सशरीर प्रकट हुए थे और सशरीर मगहर से अपने सतलोक गए थे।
हाड चाम लोहू नहीं मोरे, जाने सत्यनाम उपासी।
तारन तरन अभै पद दाता, मैं हूं कबीर अविनासी।।


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Wednesday, June 3, 2020

कबीरपरमेश्वर_का_अद्भुतज्ञान

🏅कबीर परमेश्वर जी ने गुरू और सतगुरू में भेद बताया तथा सच्चे गुरु के लक्षण बताए।
सतगुरु के लक्षण कहु, मधुरे बेन विनोद, 
चार वेद छः सास्त्र, वो कह अट्ठारह बोध।।
कबीर साहेब जी ने तत्वज्ञान दिया कि मानव जीवन में सतगुरु बनाकर भक्ति करना परमावश्यक है। सच्चे गुरु की शरण में जाकर दीक्षा लेने से ही पूर्ण लाभ मिलेगा, अन्यथा मानव जीवन बर्बाद है।
वर्तमान में पूर्ण सतगुरु केवल संत रामपाल जी महाराज ही हैं। उनसे सतभक्ति प्राप्त करके मोक्ष प्राप्त करें।


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गोवर्धन पूजा

 गोवर्धन पूजा क्या है?????????? गोवर्धन पूजा के सम्बन्ध में एक लोकगाथा प्रचलित है। कथा यह है कि देवराज इन्द्र को अभिमान हो गया था। इन्द्र का...